MP S T Hassan

Women Legal Age of Marriage: केंद्र सरकार ने देश में समाज सुधार से जुड़ा एक बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय कैबिनेट ने लड़कियों के विवाह की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. यानी अब लड़कों की तरह ही लड़िकयों की शादी की आधिकारिक उम्र 21 साल होने जा रही है. लेकिन जबसे (Women Legal Age of Marriage) यह फैसला लिया गया है तभी से समाजवादी पार्टी (सपा) के कई नेता आपत्ति जाहिर कर चुके हैं. हाल ही में सपा सांसद एसटी हसन ने शुक्रवार को केंद्र के फैसले का विरोध करते हुए अटपटा बयान दिया है.

सांसद एसटी हसन का बयान
हसन ने कहा कि जब लड़कियां बच्चे पैदा करने लायक हो जाएं तो उनकी शादी कर देनी चाहिए। अपने तर्कों में उन्होंने यह भी कह डाला कि उम्र बढ़ने पर बच्चे पोर्न फिल्में देखने लगते हैं और उनमें अनुशासनहीनता बढ़ जाती है।

एएनआई से बात करते हुए हसन ने कहा, ”महिलाओं की प्रजनन आयु 16-17 वर्ष से 30 वर्ष तक होती है। (Women Legal Age of Marriage) 16 साल की उम्र से ही शादी के प्रस्ताव आने लगते हैं। यदि शादी में देर की जाती है तो इसके दो नुकसान हैं, एक है बांझपन की संभावना। दूसरी यह कि दूसरा यह है कि जब कोई बूढ़ा हो जाता है तो बच्चे व्यवस्थित नहीं होते हैं। जब आप जिंदगी के आखिरी दशक में तब भी आपके बच्चे स्टूडेंट ही होते हैं। हम प्राकृतिक प्रक्रिया को तोड़ रहे हैं।”

सपा सांसद ने कहा, ”मैं मानता हूं कि जब एक लड़की परिपक्व हो जाती है और प्रजनन की उम्र हासिल कर लेती है, उसकी शादी हो जानी चाहिए। यदि एक लड़की 16 साल में परिपक्व हो जाती है तो उसकी शादी 16 में हो सकती है। (Women Legal Age of Marriage) यदि वह 18 की उम्र में वोट कर सकती है तो वह शादी क्यों नहीं कर सकती है? बच्चे जब बड़े होते हैं तो अनुशानहीनता बढ़ जाती है, जब वे पोर्न वीडियो और फोटो देखने लगते हैं।”

सांसद ने आगे कहा, ”हमने लिव इन रिलेशन को मंजूरी दे दी है, जो दिखाता है कि अनुशासनहीनता बढ़ गई है।(Women Legal Age of Marriage) इस उम्र में हार्मोनल बदलाव अपराध की ओर ले जा सकते हैं। इससे पहले गुरुवार को सपा नेता अबु आजमी ने भी कहा था कि शादी की उम्र बढ़ाए जाने से लड़कियां गलत रास्ते पर जा सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि यह कानून ऐसे लोग ला रहे हैं, जिनके अपने बच्चे नहीं हैं। इस मुद्दे पर ग्रामीणों और आदिवासियों की राय ली जानी चाहिए।