इस दिन शिवजी की पूजा अत्यंत शुभ फलदायी होती है। महाशिवरात्रि भगवान शिव के विवाह की रात्रि मानी गई है। इसे प्रकृति और पुरुष के संयोग का दिन भी कहा जाता है। जबकि अन्य शिवरात्रि इसकी पुनावृत्ति है. सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना गया है क्योंकि इस समय शिवजी रुद्र रूप में सृष्टि का संचालन करते हैं। इसलिए सावन महीने की शिवरात्रि को भी महाशिवरात्रि के समान ही महत्व प्राप्त है।

सावन में कांवड़ यात्रियों की बड़ी इच्छा रहती है कि वह शिवरात्रि के दिन शिवजी का गंगाजल से अभिषेक करें। इस वर्ष शिवरात्रि के अवसर पर बड़ा ही अद्भुत संयोग बना है जो इसे महाशिवरात्रि के समान ही फलदायी बना रहा है। इस वर्ष मंगलवार के दिन शिवरात्रि होने से मंगलागौरी व्रत के साथ शिवरात्रि का त्योहार भी मनाया जा रहा है।

शिवरात्रि के साथ मंगला गौरी व्रत होने से श्रद्धालुओं को शिवजी की पूजा के साथ देवी पार्वती की भी पूजा करनी चाहिए। पूजा के समय ‘ओम उमामाहेश्वराय नमः’ मंत्र का जप करना उत्तम माना गया है।

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